XXXV. Membra hominis externa. Τὰ ἔξω τοῦ ἀνθρώπου μέλη. माणुषस्य बहिरंगाणि [बहिर्गात्राणि, बहिरवयवाः] ।


XXXV




Membra hominis externa.
Caput [1] est suprā, īnfrā pedēs. Collī [2], quod in axillās [7] dēsinit, anterior pars est iugulum [3], posterior cervīx [4]. Pectus [5] est ante, retrō dorsum [6]. Sub pectore est venter [9], in eius mediō umbilīcus [10]. Ā tergō sunt scapulae [12], ā quibus umerī [13] pendent. Ab hīs brachia [14] cum cubitō [15]. Inde ad utrumque latus manūs [11], dextra [8] et sinistra [16]. Umerōs excipiunt lumbī [17] cum coxīs [18] et in pōdice (cūlō) natēs [19]. Pedem [20] absolvunt femur [21] – intermediō genū [22] –, tum crūs [23], in quō sūra [24] cum tībiā [25], porrō tālī [26], calx (calcāneum) [27] et solum (solea) [28]. In extrēmō allus [29] cum quātuor reliquīs digitīs.

Τὰ ἔξω τοῦ ἀνθρώπου μέλη.
Ἡ κεφαλὴ [1] ἄνω ἐστί, κάτω οἱ πόδες. Τὸ τοῦ τραχήλου [2], ὃ ταῖς μασχάλαις (ταῖς μάλαις) [7] ὁρίζεται, τὸ πρόσω μέρος ἡ σφαγή [3] ἐστι, τὸ ὀπίσω ὁ αὐχήν [4]. Τὸ στῆθος [5] πρόσω ἐστὶν, ὀπίσω ὁ νῶτος [6]. Ὑπὸ τοῦ στήθους γαστήρ [9] ἐστιν, ἐν μέσῳ τούτου ὁ ὀμφαλὸς [10]. Ἐπὶ τῷ νώτῳ ὠμοπλάται [12] εἰσὶν, ἀφ᾽ὧν οἱ ὤμοι [13] κρέμανται. Ἐπὶ τούτων οἱ βραχίονες [14] μετὰ τοῦ ἀγκῶνος [15]. Ἀπὸ τούτου πρὸς ἑκάτεραν πλευρὰν αἱ χεῖρες [11], ἡ δεξιὰ [8] καὶ ἡ ἀριστερά [16]. Τοῖς ὤμοις ἐπακολουθοῦσιν αἱ ὀσφύες (αἱ ψυαὶ) [17] μετὰ τῶν ἰσχίων [18] καὶ ἐν τῷ πρωκτῷ γλουτοί [19]. Εἰς τὸν πόδα [20] ἀποτελευτῶσι τὸ μηρὸς [21] – μεταξὺ τὸ γόνυ [22] –, εἶτα τὸ σκέλος [23], ἐν ᾧ ἡ γαστροκνημία [24] καὶ ἡ κνήμη [25], ἔπειτα σφυγὰ [26], πτέρνα [27] καὶ τὸ πέλμα [28]. Ἐν τῷ ἐσχάτῳ ὁ μέγας δάκτυλος [29] μετὰ τῶν τεσσάρων λοιπῶν δακτύλων.

माणुषस्य बहिरंगाणि [बहिर्गात्राणि, बहिरवयवाः]
मस्तकम् [शिरः, शीर्षम्, मूर्धा] [1] उपरि अस्ति, अधः [नीचा] पादौ [चरणौ] । या ग्रीवा [शिरोधरस्य] [2] कक्षौ [बाहुमूले, भुजकोटरे] [7] व्याप्नोति तस्याः अग्रभागः कण्ठः [गलः, कृकः] [3] भवति, पृष्ठभागः मन्ये [घाटे । अवटुः] [4] । अग्रतः उरः [वक्षः, क्रोडः] [5] अस्ति, पृष्ठतः पृष्ठम् [6] । उरसः अधः उदरम् [कुक्षिः, तुन्दम्] [9] अस्ति, तस्य मध्ये नाभिः [10] । पृष्ठतः [पृष्ठे] ये स्कन्धपीठे [अंसपीठे, अंसफलके] [12] स्तः तयोः अवलम्बतः स्कन्धौ [अंसौ] [13] । अनयोः बाहू [भुजौ] [14] कूर्परसंयुक्तौ [15] । अतः उभयत्र [उभयोः पार्श्वयोः] हस्तौ [करौ, पाणी] [11], दक्षिणः [8] वामः [सव्यः] [16] च । स्कन्धौ अनुवर्तेते श्रोणी [कटी] [17, 18] गुदे [पायौ, अपाने] च नितम्बौ [19] । पादम् [20] व्याप्नुवन्ति ऊरुः [सक्थि] [21] – मध्ये जानु [22] – अपि च या जंघा [23] तस्याम् पिंडिका [24] अग्रजंघासहिता [25] । अपरम् च गुल्फौ [घुटिके] [26], पार्ष्णिः [27] तलम् [पादतलम् [28] च । अग्रे अंगुष्ठः [29] अन्याभिः चतसृभिः अंगुलीभिः सहितः ।।

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